24 अक्टूबर 2026 - 19:18
ईरान पर हमला हक़ और बातिल की जंग,  हम हक और इंसाफ़ के साथ

इराकी इस्लामिक रेजिस्टेंस का बड़ा बयान, अमेरिका पर इराक की संप्रभुता का उल्लंघन करने और ईरान के साथ सीमा बंद कराने का दबाव बनाने का आरोप

इराक के संगठन ‘इस्लामिक रेजिस्टेंस’ ने एक अहम बयान जारी कर ईरान के समर्थन में अपनी बात रखी है। संगठन ने ईरान पर ज़ायोनी शासन और अमेरिका के हमलों को हक़ और बातिल के बीच की लड़ाई बताते हुए कहा कि वह न्याय के पक्ष में खड़ा है।

संगठन ने अपने बयान में कहा कि इराक और पूरे क्षेत्र के हालात इस समय बेहद जटिल हैं। इस्लामी प्रतिरोध ने अमेरिका और इस्राईल पर इस्लामी समुदाय के लोगों के खिलाफ लगातार कार्रवाई करने का आरोप भी लगाया।

संगठन ने आरोप लगाया कि अमेरिका इराक की संप्रभुता का लगातार उल्लंघन कर रहा है और इराकी सरकार के साथ किए गए अपने वादों को पूरा नहीं कर रहा है।

बयान के मुताबिक, इस साल 30 सितंबर से 23 अक्टूबर के बीच अमेरिकी लड़ाकू और जासूसी विमानों की ओर से हवाई क्षेत्र के 171 उल्लंघन दर्ज किए गए हैं। संगठन ने इसे समझौतों और तय जिम्मेदारियों का खुला उल्लंघन बताया।

उसने इराकी सरकार से मांग की कि वह देश की जनता को बताए कि वास्तव में क्या हो रहा है और इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करे।

इस्लामिक रेजिस्टेंस ने ईरान के साथ हवाई अड्डों और सीमा चौकियों को बंद करने के फैसलों पर भी सवाल उठाए। संगठन का आरोप है कि ये फैसले अमेरिका के दबाव और ज़ायोनी शासन की मर्जी के अनुसार लिए जा रहे हैं।

बयान में कहा गया कि जब किसी देश के फैसले बाहरी दबाव से प्रभावित होते हैं, तो उसकी राष्ट्रीय संप्रभुता की बात करना सही नहीं है। संगठन के मुताबिक, इससे इराक में अमेरिकी प्रभाव बढ़ता है और देश की स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होती है।

संगठन ने कहा कि बुराई के खिलाफ न्याय के पक्ष में खड़ा होना इंसान का कर्तव्य है। उसने ईरान के खिलाफ ज़ायोनी शासन और अमेरिका की कार्रवाई को हक़ और बातिल के बीच संघर्ष बताया।

इस बयान के जरिए संगठन ने ईरान के प्रति अपना समर्थन जाहिर किया और इराक के मामलों में अमेरिकी हस्तक्षेप का विरोध किया।

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